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Friday, August 5, 2011

माँ ऐसी होती है !




माँ ऐसी होती है ! दामन अपना करके गिला हमें सूखे मे सुलाती है माँ ऐसी होती है ! पेट बेसक हो भूखा, हमें सिने से लगाती है
माँ ऐसी होती है ! हल्क रहे शुख बेसक, हमें आँखों से पिलाती है
माँ
ऐसी होती है ! मांगे ना कुछ भी अपने लिए,हमारे लिया दीया रोज जलाती है
माँ
ऐसी होती है ! पाव मे कितने भी हो छाले,हमें गोद में घुमाती है माँ ऐसी होती है ! रोज खाए वक़्त के थपेड़े,हमारे लिया ज़माने से लड़ जाती है
माँ
ऐसी होती है ! काली शुरख हो जाये आंखे,हमारे लिया सपने रोज सजाती है
माँ ऐसी होती है ! बलांये लेती अपने सिर रोज,हमारे लिया जन्म सों-सों लुटाती है माँ ऐसी होती है !

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